पश्चिम बंगाल सरकार ने यूसीसी मसौदे के अध्ययन के लिए नौ सदस्यीय समिति की अधिसूचित
अभिषेक के सवाल पर केंद्र की स्वीकारोक्ति, 2022 से नहीं जारी किया गया एक भी रुपया
कोलकाता। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा), जिसे आम तौर पर 100 दिन का काम कहा जाता है, के तहत बंगाल का आवंटन चालू वित्त वर्ष (2024-25) में शून्य रहा है। केंद्र सरकार ने स्वयं संसद में इस तथ्य को स्वीकार किया है। तृणमूल के सांसद अभिषेक बनर्जी द्वारा लोकसभा में पूछे गए एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह चौंकाने वाला सच सामने आया। केंद्र की स्वीकारोक्ति के अनुसार, पश्चिम बंगाल को छोड़कर अन्य सभी राज्यों को चालू वित्त वर्ष का बकाया आवंटित कर दिया गया है।
टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी ने प्रश्न किया था कि मनरेगा योजना के तहत अभी तक कितनी राशि बकाया है और इसका राज्य-वार विवरण उपलब्ध कराया जाए। ग्रामीण विकास राज्य मंत्री कमलेश पायवान ने लिखित उत्तर में स्पष्ट रूप से बताया कि 2024-25 वित्त वर्ष में सभी राज्यों का बकाया चुका दिया गया है। केवल बंगाल को चालू वित्त वर्ष में एक रुपया भी नहीं दिया गया है। इतना ही नहीं, यह आवंटन वर्ष 2022 के बाद से ही रुका हुआ है। मंत्री ने अपने पत्र में स्पष्ट किया कि पश्चिम बंगाल सरकार ने केंद्र सरकार की निर्देशिकाओं का पूरी तरह से पालन नहीं किया है। धन प्राप्त करने के लिए जिन प्रक्रियाओं और मानदंडों को पूरा करना आवश्यक था, राज्य सरकार उसमें विफल रही है। पत्र में उन कमेटियों और समीक्षाओं (रिव्यू) का भी विस्तृत उल्लेख है, जिनके आधार पर धन जारी न करने का निर्णय लिया गया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुद्दा आगामी चुनावों में एक प्रमुख हथियार बनेगा। 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले भी टीएमसी ने बकाया राशि को लेकर दिल्ली में अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व में धरना दिया था। विश्लेषकों का मत है कि अभिषेक बनर्जी का यह प्रश्न यह स्पष्ट करता है कि 2026 के विधानसभा चुनावों में भी यह मुद्दा केंद्र की बंचना के रूप में उठाया जाएगा। टीएमसी के राज्य उपाध्यक्ष जयप्रकाश मजूमदार ने केंद्र के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में मुकदमा चल रहा है। केंद्र हाईकोर्ट में भी हारा था और अब सुप्रीम कोर्ट में भी हार होगी। सुप्रीम कोर्ट का स्पष्ट निर्देश है कि काम शुरू करना होगा और बकाया पैसा देना होगा। इसके बावजूद ग्रामीण विकास मंत्रालय ऐसी बातें कह रहा है। गौरतलब है कि पिछले साल अक्टूबर महीने में मनरेगा मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को स्पष्ट निर्देश दिया था कि वह पश्चिम बंगाल का सभी बकाया पैसा तुरंत जारी करे। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि चुनाव से ठीक पहले आया यह सुप्रीम निर्देश भी सत्ताधारी दल (टीएमसी) को चुनावी लाभ (डिविडेंड) देगा। इस बीच, बीजेपी सांसद सुकांत मजूमदार ने टीएमसी के आरोपों पर पलटवार करते हुए कहा कि हमें आवंटन शून्य मिला है, क्योंकि बंगाल में चोरी हुई है। बीजेपी का आरोप है कि मनरेगा फंड के दुरुपयोग और भ्रष्टाचार के कारण ही केंद्र ने फंड रोका है।